अकोला की जीवनरेखा पर जल संकट, महान बांध में पिछले साल से 30% कम पानी

 पानी के बीच स्थित पहाड़ियां हुईं उजागर, 

काटा-कोंडाला नदी का बांध में अब तक नहीं हुआ आगमन
चाका तीर्थ संग्रहण तालाब अब भी खाली, पांच में से दो वाल्व पानी से बाहर आए






अकोला बातमी पत्र
अनीस शेख
महान | प्रतिनिधि

अकोला जिले की जीवनरेखा माने जाने वाले महान बांध के जलस्तर में अब तक अपेक्षित बढ़ोतरी नहीं होने से शहरवासियों की चिंता लगातार बढ़ रही है।महान बांध से अकोला शहर, मूर्तिजापुर शहर, बोरगांव मंजू, अकोला एमआईडीसी, महान मत्स्य बीज केंद्र तथा खांभोरा-उन्नई ग्रामीण जलापूर्ति योजना के अंतर्गत 64 गांवों को पूरे वर्ष पेयजल उपलब्ध कराया जाता है। इसके अलावा नदी किनारे के हजारों हेक्टेयर कृषि क्षेत्र को रबी फसलों की सिंचाई के लिए भी बांध से वाल्व के माध्यम से पानी छोड़ा जाता है।इस वर्ष मानसून के दौरान अपेक्षाकृत कम वर्षा होने के कारण बारिश का मौसम शुरू हुए लगभग दो महीने बीत जाने के बावजूद महान बांध के जलसंग्रह में कोई उल्लेखनीय वृद्धि नहीं हुई है।30 जुलाई 2025 को महान बांध का जलस्तर 344.09 मीटर, जलसंग्रह 40.785 मिलियन घन मीटर तथा भंडारण 47.23 प्रतिशत था। जबकि 30 जुलाई 2026 को जलस्तर घटकर 340.53 मीटर, जलसंग्रह 14.889 मिलियन घन मीटर तथा भंडारण केवल 17.24 प्रतिशत रह गया है। इस प्रकार पिछले वर्ष की तुलना में इस वर्ष बांध में लगभग 30 प्रतिशत कम जल भंडारण दर्ज किया गया है।


अकोला शहर को पेयजल उपलब्ध कराने के लिए महान बांध में कुल पांच वाल्व लगाए गए हैं। जलस्तर लगातार घटने के कारण इनमें से दो वाल्व पूरी तरह पानी से बाहर आ चुके हैं। यदि आने वाले दिनों में अच्छी बारिश नहीं हुई तो तीसरा वाल्व भी जल्द ही पानी से बाहर आने की आशंका है।महान बांध में पानी लाने वाली काटा-कोंडाला नदी, जो वाशिम जिले के मालेगांव क्षेत्र से होकर आती है, अकोला बातमी पत्र इस वर्ष पर्याप्त वर्षा नहीं होने के कारण अब तक नहीं बह सकी है। 


नदी का अधिकांश हिस्सा अभी भी सूखा पड़ा हुआ है।जऊळका रेलवे स्थित चाका तीर्थ संग्रहण तालाब भरने के बाद ही मालेगांव क्षेत्र से आने वाला पानी काटा-कोंडाला नदी के माध्यम से महान बांध तक पहुंचता है। इसलिए इस तालाब का भरना महान बांध के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। लेकिन आज की स्थिति में यह तालाब भी पूरी तरह खाली पड़ा है।बांध का जलस्तर लगातार घटने से पानी के भीतर स्थित कई पहाड़ियां अब बाहर दिखाई देने लगी हैं। यहां तक कि बांध के बीच स्थित हगदरी पहाड़ी पर मवेशी चरते हुए दिखाई दे रहे हैं, जो जलसंकट की गंभीरता को दर्शाता है।महान सिंचाई विभाग के अनुसार, 30 जुलाई 2025 तक बांध क्षेत्र में 219 मिमी वर्षा दर्ज की गई थी, जबकि 30 जुलाई 2026 तक केवल 148 मिमी वर्षा हुई है।पिछले वर्ष इसी दिन तक चाका तीर्थ संग्रहण तालाब भर चुका था और काटा-कोंडाला नदी का पानी महान बांध में पहुंचने लगा था, जिससे जलसंग्रह बढ़कर 47 प्रतिशत तक पहुंच गया था। लेकिन इस वर्ष ऐसी स्थिति अब तक नहीं बन सकी है।

महान बांध अकोला शहर की जीवनरेखा है और इसी पर हजारों-लाखों नागरिकों की सालभर की पेयजल व्यवस्था निर्भर करती है। पर्याप्त वर्षा नहीं होने के कारण बांध आज भी पानी के इंतजार में है।हालांकि महान बांध वर्षा जल को संचित करने के लिए पूरी तरह तैयार है, लेकिन आने वाले दो महीनों में बारिश कैसी होती है, इसी पर शहरवासियों और किसानों का भविष्य काफी हद तक निर्भर करेगा।महान बांध की स्थिति पर कार्यकारी अभियंता चिन्मय वाकोडे तथा बोरगांव मंजू के उपविभागीय अधिकारी आदित्य कासार के मार्गदर्शन में महान शाखा के अभियंता संदीप नेमाडे, मनोज पाठक और वैभव उगले लगातार नजर बनाए हुए हैं तथा जल प्रबंधन की योजना पर कार्य कर रहे हैं।




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