महान बांध की जलस्थिति चिंताजनक, अब आसमान की ओर टिकी निगाहें
अनिस शेख, महान प्रतिनिधि
अकोला शहर के साथ-साथ मुर्तिजापुर शहर, बोरगांव मंजू, अकोला एमआईडीसी, महान मत्स्य बीज केंद्र तथा खांभोरी उन्नई ग्रामीण जलापूर्ति योजना के अंतर्गत आने वाले 64 गांवों को वर्षभर पीने के पानी की आपूर्ति महान बांध से की जाती है। ऐसे में इस वर्ष बांध में कम जलसाठा होने से शहरवासियों के साथ किसानों की चिंता भी बढ़ गई है।गत वर्ष 15 अगस्त 2025 को महान बांध में 65 प्रतिशत से अधिक जलसाठा उपलब्ध था। उस समय सिंचाई विभाग की ओर से महान बांध पर 15 अगस्त की रात लेजर शो का आयोजन किया गया था। बांध में पर्याप्त पानी होने के कारण कार्यक्रम के दौरान कुछ समय के लिए बांध के सभी दस गेट खोलकर नदी में पानी छोड़ा गया था। इसके बाद भी बारिश जारी रहने से जलसाठे में तेजी से वृद्धि हुई और अतिरिक्त पानी निकालने के लिए कई बार बांध के गेट खोलने पड़े थे।इसके विपरीत इस वर्ष बारिश की मात्रा काफी कम रही है। महान बांध के जलसाठे में वृद्धि करने वाली मुख्य काटा कोंडाला नदी भी अभी तक पूरी तरह प्रवाहित नहीं हुई है। इसके चलते मालेगांव परिसर में हुई बारिश का पर्याप्त पानी महान बांध तक नहीं पहुंच पाया है। यह स्थिति अकोला शहरवासियों के साथ किसानों के लिए भी चिंता का विषय बनी हुई है।गत वर्ष 15 अगस्त 2025 को महान बांध में 345.54 मीटर जलस्तर, 56.633 दशलक्ष घनमीटर जलसाठा और 65.58 प्रतिशत जलसाठा उपलब्ध था। वहीं, उस समय 15 अगस्त तक बांध परिसर में कुल 301 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई थी।इस वर्ष 15 अगस्त 2026 को बांध में केवल 341.58 मीटर जलस्तर, 21.709 दशलक्ष घनमीटर जलसाठा और 25.14 प्रतिशत जलसाठा उपलब्ध है। यानी गत वर्ष की तुलना में इस वर्ष महान बांध में 40.44 प्रतिशत कम जलसाठा है। इस वर्ष बारिश शुरू होने से लेकर 15 अगस्त तक बांध परिसर में कुल 205 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई है।पावसाळ्याचे चार महीने में से सव्वा दो महीने बीत चुके हैं और अब करीब पौने दो महीने का समय शेष है। इस दौरान बारिश कैसी रहती है, इस पर जिलेवासियों और किसानों की नजरें टिकी हुई हैं। जलाशय परिचालन आराखड़े के अनुसार 16 अगस्त से 31 अगस्त के दौरान महान बांध में 94.804 प्रतिशत जलसाठा आरक्षित रखना आवश्यक है। इसके मुकाबले वर्तमान जलसाठा काफी कम है और बांध में करीब 69 प्रतिशत जलसाठे की आवश्यकता बताई जा रही है।महान बांध के जलसाठे और स्थिति पर कार्यकारी अभियंता चिन्मय वाकोडे तथा बोरगांव मंजू के उपविभागीय अधिकारी आदित्य कासार के मार्गदर्शन में महान के शाखा अभियंता संदीप नेमाडे, वैभव उगले और मनोज पाठक लगातार नजर बनाए हुए हैं तथा जलसाठे का उचित नियोजन किया जा रहा है।
मालेगांव परिसर में जोरदार बारिश की जरूरत
महान बांध के जलस्तर में वृद्धि के लिए मालेगांव परिसर में जोरदार बारिश होना बेहद जरूरी है। मालेगांव परिसर से बहने वाली मुख्य काटा कोंडाला नदी महान बांध में आकर मिलती है। महान बांध और काटा कोंडाला के बीच करीब 10 से 12 छोटे-बड़े बांध एवं बंधारे हैं।कम बारिश के कारण जऊळका रेलवे स्थित चाका तीर्थ संग्रहक तालाब भी अभी पूरी तरह नहीं भर पाया है और लगभग 30 से 40 प्रतिशत खाली है। चाका तीर्थ संग्रहक तालाब भरने के बाद ही मालेगांव परिसर में होने वाली बारिश का पानी महान बांध तक पहुंच सकता है। इसलिए मालेगांव, काटा कोंडाला, जऊळका रेलवे, धानोरा और फेट्रा क्षेत्र में दमदार बारिश होना बेहद आवश्यक है।महान बांध में जलसाठा कम होने के कारण वर्तमान में बांध के अंदर की पहाड़ियां भी खुले तौर पर दिखाई दे रही हैं।

