ईमानदार नेतृत्व की सफलता की कहानी : शिक्षा अधिकारी इटकर ने बदली शिक्षा विभाग की तस्वीर
महानगरपालिका आयुक्त डॉ. सुनील लहाने ने जुलाई 2025 में शिक्षा विभाग की जिम्मेदारी श्री इटकर को सौंपी थी। पदभार संभालने के बाद उन्होंने वर्षों से लंबित कई महत्वपूर्ण मुद्दों का समाधान कर विभाग को नई दिशा प्रदान की।शिक्षकों की पदोन्नति, सेवा संबंधी समस्याओं का निराकरण, विद्यालयों के विकास हेतु निधि उपलब्ध कराना तथा शैक्षणिक गुणवत्ता में सुधार जैसे अनेक महत्वपूर्ण विषयों पर उन्होंने विशेष ध्यान दिया। पालकमंत्री निधि तथा शिक्षक विधायक निधि के माध्यम से महानगरपालिका स्कूलों में डिजिटल बोर्ड उपलब्ध कराए गए। इसके अलावा विधायक निधि से विभिन्न विद्यालयों के लिए सुरक्षा दीवारों तथा अन्य विकास कार्यों को मंजूरी दिलाने में भी उन्होंने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।महाराष्ट्र शासन के निर्देशानुसार महानगरपालिका स्कूलों में सोशल ऑडिट की प्रक्रिया को प्रभावी ढंग से लागू करने का श्रेय भी श्री इटकर को जाता है। कई वर्षों से लंबित इस प्रक्रिया को सफलतापूर्वक पूर्ण कर उन्होंने विद्यालयों के कामकाज में पारदर्शिता बढ़ाने का महत्वपूर्ण कार्य किया।
विशेष रूप से वर्ष 2003 से लंबित बिंदुनामावली (रोस्टर) के कार्य को आगे बढ़ाने के लिए उन्होंने शासन स्तर पर लगातार प्रयास किए। इसके परिणामस्वरूप मराठी, हिंदी और गुजराती माध्यम की बिंदुनामावलियां पूर्ण हो चुकी हैं, जबकि उर्दू माध्यम की बिंदुनामावली अंतिम चरण में है और शासन को प्रस्तावित की जा चुकी है। दो दशकों से अधिक समय से लंबित इस विषय का समाधान उनके कार्यकाल की बड़ी उपलब्धियों में गिना जा रहा है।महानगरपालिका शिक्षकों को सातवें वेतन आयोग के बकाया अंतर की राशि दिलाने के लिए उन्होंने शासन से 50 प्रतिशत निधि प्राप्त करने हेतु शिक्षक संगठनों के साथ समन्वय बनाकर लगातार प्रयास किए। निधि प्राप्त होने के बाद लगभग 830 शिक्षक, शिक्षकेतर कर्मचारी, सेवानिवृत्त कर्मचारी और पेंशनधारकों के खातों में राशि जमा करने की प्रक्रिया पूरी पारदर्शिता के साथ संपन्न की गई। उल्लेखनीय बात यह रही कि इस पूरी प्रक्रिया में भ्रष्टाचार का कोई आरोप या शिकायत सामने नहीं आई।विभाग में कर्मचारियों की कमी होने के बावजूद उन्होंने केवल प्रशासनिक अधिकारी की भूमिका तक स्वयं को सीमित नहीं रखा, बल्कि बिल तैयार करने, दस्तावेजों की पूर्ति, लेखा परीक्षण और निधि वितरण जैसे कार्यों में भी सक्रिय भागीदारी निभाई। अपने सहयोगी अधिकारियों और कर्मचारियों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर काम करते हुए उन्होंने टीम भावना का उत्कृष्ट उदाहरण प्रस्तुत किया।उनके नेतृत्व में महानगरपालिका के कई विद्यालयों ने शैक्षणिक गुणवत्ता, छात्र संख्या, आधारभूत सुविधाओं तथा विभिन्न शासकीय योजनाओं के क्रियान्वयन में उल्लेखनीय प्रगति हासिल की है। ईमानदारी, पारदर्शिता, कर्तव्यनिष्ठा और विकासोन्मुख दृष्टिकोण के कारण उन्होंने शिक्षकों, कर्मचारियों, अभिभावकों और जनप्रतिनिधियों का विश्वास अर्जित किया है।
ईमानदारी, पारदर्शिता और विकास की पहचान बने हरीशचंद्र इटकर : सरदार खान
महाराष्ट्र राज्य उर्दू शिक्षक संघ के वरिष्ठ नेता सरदार खान ने अकोला महानगरपालिका के शिक्षा अधिकारी हरीशचंद्र इटकर के कार्यों की प्रशंसा करते हुए उन्हें हार्दिक बधाई दी है। उन्होंने कहा कि श्री इटकर ने अपनी ईमानदार कार्यशैली, पारदर्शी प्रशासन और शिक्षक-कर्मचारियों के हित में लिए गए प्रभावी निर्णयों के माध्यम से शिक्षा विभाग में एक नई कार्यसंस्कृति विकसित की है।सरदार खान ने कहा कि किसी भी अधिकारी की पहचान उसके पद से नहीं, बल्कि उसके द्वारा किए गए जनहितकारी और विकासोन्मुख कार्यों से होती है। शिक्षा अधिकारी हरीशचंद्र इटकर ने इस विचार को अपने कार्यों से साबित किया है। उनके नेतृत्व में अकोला महानगरपालिका शिक्षा विभाग ने न केवल प्रशासनिक स्तर पर उल्लेखनीय सुधार किए हैं, बल्कि विभाग की कार्यप्रणाली को अधिक जवाबदेह, पारदर्शी और परिणाममुखी बनाया है।उन्होंने आगे कहा कि श्री इटकर के प्रयासों से शिक्षा विभाग की छवि में सकारात्मक परिवर्तन आया है, जिससे शिक्षकों, कर्मचारियों और अभिभावकों में विश्वास बढ़ा है। उनका कार्यकाल शिक्षा क्षेत्र में सुशासन और समर्पित नेतृत्व का उत्कृष्ट उदाहरण बनकर उभरा है। सरदार खान ने विश्वास व्यक्त किया कि श्री इटकर का कार्य अन्य अधिकारियों के लिए भी प्रेरणादायी साबित होगा और शिक्षा व्यवस्था को नई दिशा देने में सहायक रहेगा।

