आरएसएस कार्यालय हमला मामले में विधायक साजिद खान पठान सहित सभी आरोपी बरी

 16 वर्ष पुराने मामले में अदालत का महत्वपूर्ण फैसला



अकोला : लगभग 16 वर्ष पुराने आरएसएस कार्यालय हमला प्रकरण में न्यायालय ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए विधायक साजिद खान पठान, पूर्व महापौर मदन भरगड़ तथा कांग्रेस के अन्य सभी कार्यकर्ताओं को सभी आरोपों से बरी कर दिया।प्राप्त जानकारी के अनुसार, 12 नवंबर 2010 को फरियादी शशांक शरदचंद्र जोशी ने सिटी कोतवाली पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि मदन भरगड़, साजिद खान पठान, मब्बा पहलवान, प्रकाश तायडे तथा कांग्रेस के अन्य कार्यकर्ता एकत्रित होकर गांधी चौक स्थित राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) कार्यालय के समक्ष पहुंचे और उनके हाथों में लाठियां, जलता हुआ पुतला, पटाखे तथा पत्थर थे। आरोप था कि इस दौरान कार्यालय पर हमला किया गया।शिकायत के अनुसार इस घटना में एक पुलिस कर्मचारी तथा आरएसएस के दो कार्यकर्ता घायल हुए थे। बताया गया कि यह घटना तत्कालीन संघ प्रमुख सुदर्शन जी द्वारा सोनिया गांधी के संबंध में दिए गए एक बयान के विरोध में हुई थी।इस मामले में आरोपियों के विरुद्ध भारतीय दंड संहिता की धारा 147, 148, 149, 336, 337, 294, 323, 452, 427, 504, 506, 436, 511 तथा 135 के तहत अपराध दर्ज किया गया था। मामले की जांच तत्कालीन सिटी कोतवाली थाना प्रभारी विलास पाटील ने की थी तथा जांच पूरी कर आरोपियों के विरुद्ध न्यायालय में दोषारोप पत्र (चार्जशीट) प्रस्तुत किया गया था।यह मामला अकोला के प्रथम श्रेणी न्यायिक दंडाधिकारी (जेएमएफसी) ए. जे. गिरे के न्यायालय में विचाराधीन था। सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से 10 गवाहों के बयान दर्ज कराए गए।बचाव पक्ष की ओर से अधिवक्ता दिलदार खान ने सभी गवाहों की जिरह करते हुए उनके बयानों में मौजूद विरोधाभासों तथा घटनास्थल पर उनकी उपस्थिति को लेकर गंभीर प्रश्न उठाए। बचाव पक्ष ने न्यायालय के समक्ष विस्तृत एवं प्रभावी तर्क प्रस्तुत किए।अभियोजन और बचाव पक्ष की दलीलें सुनने के बाद माननीय न्यायालय ने अपना निर्णय सुनाते हुए विधायक साजिद खान पठान, पूर्व महापौर मदन भरगड़ तथा कांग्रेस के सभी अन्य कार्यकर्ताओं को इस मामले में सभी आरोपों से बरी कर दिया।आरोपियों की ओर से अधिवक्ता दिलदार खान, अधिवक्ता दुष्यंत चव्हाण, अधिवक्ता जाधव, अधिवक्ता अमीन खान, अधिवक्ता शर्मा तथा अधिवक्ता दीपेश धायडे ने पैरवी की।

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