महान बांध में पुनर्वसित गांव हुए उजागर, मारुति मंदिर के साथ गंगामाता मंदिर भी आया पानी से बाहर

तीसरा वॉल्व भी जल्द पानी से बाहर आने की कगार पर, जलस्तर घटकर 18.13 प्रतिशत


अकोला बातमी पत्र  अकोला

अनिस शेख

महान प्रतिनिधि

अकोला। अकोला शहर, मुर्तिजापुर शहर, बोरगांव मंजू सहित नदी किनारे बसे 64 गांवों की वर्षभर प्यास बुझाने वाले महान बांध की जलस्थिति इस समय बेहद चिंताजनक बनी हुई है। इस वर्ष अपेक्षित बारिश नहीं होने के कारण महान बांध का जलसंचय 25 प्रतिशत तक भी नहीं पहुंच सका। जलस्तर लगातार नीचे जाने से बांध के निर्माण के समय पुनर्वसित किए गए कई पुराने गांवों के अवशेष अब पानी से बाहर दिखाई देने लगे हैं। वहीं, महान बांध के जलाशय में स्थित प्राचीन मारुति मंदिर तथा श्री क्षेत्र वाघागढ़ संस्थान का गंगामाता मंदिर भी पानी से पूरी तरह बाहर आ गया है।महान बांध के पुनर्वसित पुराने वाघा गांव में स्थित प्राचीन मारुति मंदिर जलस्तर घटने के कारण अब खुले में दिखाई दे रहा है। जिस क्षेत्र में कुछ समय पहले तक पानी ही पानी नजर आता था, वहां अब मवेशियों को चरते हुए देखा जा सकता है। इसी क्षेत्र से महान बांध में पानी पहुंचाने वाली काटा कोंडाला नदी का पात्र भी पूरी तरह सूख गया है। नदी का पात्र सूखने से बांध में पानी की आवक पर भी इसका सीधा असर दिखाई दे रहा है।महान बांध के किनारे स्थित श्री क्षेत्र वाघागढ़ संस्थान का गंगामाता मंदिर भी इस समय जलाशय से काफी दूर हो गया है। यह मंदिर महान बांध के पानी में निर्मित है। जलसंचय में लगातार कमी आने के कारण मंदिर के कॉलम के साथ ही मंदिर परिसर की कुएं जैसी संरचना भी अब खुले में दिखाई दे रही है।अकोला बातमी पत्र  संस्थान के दूसरे हिस्से की ओर काटेपूर्णा अभयारण्य स्थित है। अभयारण्य के सामने का वह विशाल क्षेत्र, जहां हमेशा बांध का पानी दिखाई देता था, अब पूरी तरह उजागर हो चुका है।इस वर्ष बारिश की स्थिति संतोषजनक नहीं रहने के कारण महान बांध में अपेक्षित जलसंचय नहीं हो पाया। 6 अक्टूबर 2026 को महान बांध का जलस्तर 340.65 मीटर, उपलब्ध जलसंचय 15.656 दशमलव घन मीटर तथा जलसंचय केवल 18.13 प्रतिशत दर्ज किया गया है। वहीं, इस वर्ष अब तक कुल 224 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई है।इसके मुकाबले पिछले वर्ष 6 अक्टूबर 2025 को महान बांध में 347.77 मीटर जलस्तर, 86.350 दशमलव घन मीटर जलसंचय और 100 प्रतिशत जलभंडार उपलब्ध था। उस समय महान बांध का पूरा परिसर पानी से लबालब भरा हुआ था। गंगामाता मंदिर के ऊपरी कॉलम तक पानी पहुंचा हुआ था और बांध का पूरा क्षेत्र जलमय दिखाई देता था। पिछले वर्ष की तस्वीर अकोला बातमी पत्र और इस वर्ष की स्थिति में जमीन-आसमान का अंतर दिखाई दे रहा है।जलस्तर में आई भारी गिरावट के कारण महान बांध के निर्माण के समय पुनर्वसित किए गए कई गांवों के पुराने अवशेष अब एक बार फिर दिखाई देने लगे हैं। इनमें कोथली, साथली, वाघा सहित अन्य गांवों का समावेश है। पानी घटने के साथ इन गांवों के पुराने मंदिर, रास्ते तथा अन्य अवशेष भी धीरे-धीरे सामने आ रहे हैं।



तीसरा वॉल्व भी पानी से बाहर आने की कगार पर

अकोला शहर को पेयजल उपलब्ध कराने के लिए महान बांध में कुल पांच वॉल्व लगाए गए हैं। जलस्तर में भारी गिरावट के कारण इनमें से दो वॉल्व पहले ही पानी से बाहर आ चुके हैं। अब तीसरा वॉल्व भी आने वाले कुछ ही दिनों में पानी से बाहर आने की स्थिति में पहुंच गया है। यदि जलस्तर में इसी तरह गिरावट जारी रही और बारिश नहीं हुई तो अकोला शहर के पेयजल नियोजन के सामने गंभीर चुनौती खड़ी हो सकती है।



बाष्पीभवन से भी जलसंचय में लगातार कमी

वर्तमान में तापमान बढ़ने के कारण महान बांध के जलसंचय पर बाष्पीभवन का भी असर पड़ रहा है। दिन-प्रतिदिन उपलब्ध पानी की मात्रा में कमी हो रही है। वर्तमान समय में महान बांध से केवल अकोला शहर को पानी की आपूर्ति की जा रही है और अन्य किसी भी उपयोग के लिए बांध के पानी पर कड़े प्रतिबंध लगाए गए हैं। उपलब्ध जलसंचय को अकोला बातमी पत्र अकोला शहर के पेयजल के लिए आरक्षित रखा गया है। इसके बावजूद जलाशय का पानी मुख्य गेट से काफी दूर और गहराई में चला गया है।महान बांध के उपलब्ध जलसंचय पर कार्यकारी अभियंता चिन्मय वाकोडे तथा बोरगांव मंजू के उपविभागीय अधिकारी आदित्य कासार के मार्गदर्शन में महान के शाखा अभियंता संदीप नेमाडे, वैभव उगले और मनोज पाठक द्वारा लगातार नजर रखी जा रही है। उपलब्ध पानी का नियोजन करते हुए अकोला शहर के लिए पेयजल व्यवस्था सुचारू रखने के प्रयास किए जा रहे हैं।



सड़कों पर बह रहा पेयजल, जलसंपदा विभाग को गंभीरता से ध्यान देने की जरूरत

महान बांध में उपलब्ध सीमित जलसंचय को देखते हुए अकोला शहर में पेयजल की संभावित समस्या से बचने के लिए महानगरपालिका के जलसंपदा विभाग द्वारा समय-समय पर आवश्यक निर्णय लेकर पानी वितरण का नियोजन किया जा रहा है। लेकिन दूसरी ओर शहर के अनेक इलाकों में आज भी पेयजल का बड़े पैमाने पर अपव्यय होता दिखाई दे रहा है। कई क्षेत्रों में तीन से चार घंटे तक नल शुरू रहने के कारण बड़ी मात्रा में पेयजल सड़कों पर बहता रहता है।यदि पेयजल वितरण के दौरान नलों को नियंत्रित कर केवल एक से डेढ़ घंटे तक ही पानी उपलब्ध कराया जाए तो पानी के अनावश्यक अपव्यय को काफी हद तक रोका जा सकता है। महान बांध में जलसंचय की वर्तमान स्थिति को देखते हुए जलसंपदा विभाग को इस दिशा में तत्काल गंभीरता से ध्यान देने की आवश्यकता है। शहरवासियों को भी उपलब्ध पेयजल का उपयोग अत्यंत सावधानी और आवश्यकता के अनुसार करने की जरूरत है।



क्या फिर दोहराएगा 2004-05 का संकट?

महान बांध की वर्तमान जलस्थिति ने वर्ष 2004-05 की यादें ताजा कर दी हैं। उस समय भी महान बांध में पानी की स्थिति बेहद गंभीर हो गई थी और तीसरा वॉल्व पानी से बाहर आ गया था। उस समय महानगरपालिका के जलसंपदा विभाग ने तीसरे वॉल्व की जाली खोलकर करीब 10 हॉर्सपावर क्षमता वाली पांच मोटरों की मदद से बांध के मृत जलसंचय का उपसा किया था और इसी पानी से अकोला शहर को पेयजल उपलब्ध कराया गया था।अकोला बातमी पत्र यदि आने वाले दिनों में भी बारिश नहीं हुई और महान बांध के जलस्तर में इसी तरह गिरावट जारी रही, तो महानगरपालिका के जलसंपदा विभाग के सामने वर्ष 2004-05 की तरह मृत जलसंचय का उपयोग करने की स्थिति उत्पन्न हो सकती है। फिलहाल तीसरा वॉल्व भी पानी से बाहर आने की कगार पर पहुंच चुका है, जिससे आने वाले दिनों की चुनौती का अंदाजा लगाया जा सकता है।


पानी बचाना ही सबसे बड़ी जरूरत

महान बांध में वर्तमान में उपलब्ध बेहद सीमित जलसंचय और लगातार जारी बाष्पीभवन को देखते हुए अकोला शहरवासियों के लिए अब पानी का अत्यंत सावधानीपूर्वक उपयोग करना जरूरी हो गया है। पेयजल का अनावश्यक इस्तेमाल और बर्बादी अकोला बातमी पत्र  आने वाले दिनों में शहर के लिए गंभीर संकट खड़ा कर सकती है। नागरिकों को नलों को खुला नहीं छोड़ना चाहिए, वाहनों और अन्य कामों के लिए पेयजल का अनावश्यक उपयोग नहीं करना चाहिए तथा हर स्तर पर पानी बचाने का प्रयास करना चाहिए।महान बांध की मौजूदा तस्वीर साफ संकेत दे रही है कि पिछले वर्ष जहां 100 प्रतिशत जलसंचय के कारण पूरा बांध परिसर जलमय था, वहीं इस वर्ष केवल 18.13 प्रतिशत पानी बचा है और बांध में पुनर्वसित गांवों के अवशेष, मंदिर तथा सूखे नदी-नाले सामने आ गए हैं। ऐसे में बारिश की उम्मीद के साथ-साथ उपलब्ध पानी को बचाकर रखने की जिम्मेदारी प्रशासन के साथ ही प्रत्येक नागरिक की भी है। जल ही जीवन है—पानी की हर बूंद बचाना आज समय की सबसे बड़ी जरूरत है।

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